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By WE 3 DOCTORS · 61 caption lines · Watch on YouTube
तो फिर हर तरफ से शहर शहर से घर घर से घर घर के डरो दीवार से ये पुकार सुने देती की ये कोठी चमन को नजर ए रही है बधाई पे अपनी जरीन ए रही है जरा इसके रसूल [प्रशंसा] ए रही है खड़ा दिल की उदास सुनता रहा और फिर भारी महफिल में सिर्फ बाजार पूछता रहा के इकबाल क्या ये वही धरती है जिसका आपने ख्वाब देखा था जहां ला इलाही इल्लल्लाह के सई में मोहम्मद और रसूल अल्लाह का शिकार रेज करने चले थे जहां को आज भी अनलहाते खेत खिल्यानों से आज भी खुश है गंदम से रोजी मुहियासर ने जी पलटने झपटने और झट कर पलटने शाहीन पर तुझे बड़ा नस था वो अपनी वो कब्रुक होकर ऊंची से ऊंची उड़द को भूल कर गुंबदे शाही में बसेरा कर चुका है तेरा वो मरदे मन जो आएंगे खुद ही के फलसफे को बाजार ए हुसैन में सस्ते दमोह बेचकर शमशीरो सरक को बैंड नियमों ताखू में सजाकर बेबाकी और कोई से घबराकर मक्कारी और रुबाई पे एतराज चुका है हंसते आज भी देखा है बिलारी को चुका है नमाजे आज भी पड़ता है [प्रशंसा] फर्क तबाही ना रही शोले मकई ना रही र गई रस में आजा रहे बिलन रही फलसफा र गया कल्की ने खाजा ली है [प्रशंसा] घरों के चराग बुझने लगे मासूम ख्वाहिश अमीरों की दहलीज पर दम तोड़ने लगे दूसरों
की इज्जत का जनाजा निकालना वाले खुद को इज्जत दूर और गैरत बैंड होने लगे तो फिर हर तरफ से शहर से घर घर से घर घर के डरो दीवार से ये पुकार सुने देती की ये कोठी चमन को नजर ए रही है बधाई पे अपनी जरिंडा रही है जरा इसके परिंदे में गरीबों की बू ए रही है खून ए गरीबों की बा ही है खाना कब में गली चले की दीवार गिरे जान लगे लेकिन यहां कोई पूछने वाला नहीं क्योंकि जमाने के अंदाज बदले गए [प्रशंसा] लेकिन यहां कोई पूछने वाला नहीं क्योंकि जमाने के अंदाज बदले गए गुलजार कहूं तो क्या हो कौन है कितना गुनहगार कहूं तो क्या हो तुमने जो बहुत सारे भजन जीकर सूरज चेहरा छुपा रहा है लेकिन लेकिन बादलों से कहता हूं की सूरज को मेरा पैगाम पहुंच दो उदास ना होना नाकामी कामयाबी का जीना है जिंदगी का हिस्सा है फिर मेरे दिल में एक सरसराहट से उठाती है के एक मर्द एक कलंदर उठेगा जो एक बाल के खाबो जीना की नजरियत और शोहदा आजादी की उमंग को लेकर मैदान में उतरेगा और ये नारा लगाएगी चमन के मलिक अगर बना ले मुफिक अपना शहर अब भी चमन से ए शक्ति है पलट कर चमन से रूठी बाहर अब भी शुक्रिया जी [प्रशंसा]