Getting the transcript…
By PT. NARMDESHWAR SHASTRI · 224 caption lines · Watch on YouTube
[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमस्कार प्रिय दर्शकों हाजिर हूं मैं आज जन्म कुंडली के त्रक भाव से संबंधित कुछ विशेष बातें आपके सम्मुख करने के [संगीत] लिए प्रिय दर्शकों सबसे पहले आज यह जान लीजिए कि मजबूत या बलवान कुंडली हम किसे कहते हैं तो सबसे सरल तर्क क्या है जिस कुंडली का लग्नेश बलवान हो लग्नेश डबल में बली हो लग्न पाप कर्तरी योग में ना हो लग्नेश पाप कर्तरी योग में ना हो लग्न और लग्नेश पर एक से अधिक पापक ग्रहों की दृष्टि भी लग्न और लग्नेश को कमजोर बना देती है लग्नेश त्रक भाव में ना हो यानी यह सभी स्थितियां जन्म कुंडली में ना हो तो लग्नेश के आधार पर प्रथम दृष्टि हम कहेंगे कि य जन्म कुंडली मजबूत है प्रिय दर्शकों वही अगर थोड़ा हम और आगे बढ़ कर के देखें तो कुंडली में द्वितीय भाव है चतुर्थ भाव है पंचम भाव सप्तम भाव नवम भाव यह भाव यदि मजबूत है तो इन भावों के स् और इन भावों के स्वामी अंश बल में बली है तो भी हम जन्म कुंडली को मजबूत जन्म कुंडली कहेंगे प्रिय दर्शकों जन्म कुंडली में दशम भा का स्वामी अगर बलवान हो तो जातक कार्यक्षेत्र में अवश्य ही सफलता प्रदान करता है यानी ऐसी स्थिति हो कुंडली में तब भी हम जन्म कुंडली को मजबूत कुंडली
मानेंगे परंतु आज जिस विषय पर चर्चा करने के लिए मैं उपस्थित हुआ हूं उसे जरा समझने की आवश्यकता है प्रिय दर्शको पूर्व में राशिफल में इस विषय की मैंने चर्चा की थी देखा जाए तो ऐसे जातक जो अपने जीवन काल में बेहद सफल है कम अवस्था में ही जिन्होंने विशेष सफलता हासिल कर ली जिन्होंने विशेष धन अर्जित किया उनकी कुंडली की कहानी थोड़ी अलग है अगर उनकी कुंडली की हम चर्चा करें सबसे पहले तो मैं बता दूं कि जो बलवान कुंडलियां दिख रहे हैं जैसे कि मैंने इन कुंडलियों की चर्चा की इस तरह की कुंडलियों वाले जातकों के पास अगर ऐसी कुंडली दिखाई पड़ रही है तो संभव है कि उनके पास धन हो उनके पास सुख सफलता से संबंधित चीजें हो लेकिन एक बात तय जानिए ऐसे जातक अत्यंत बली नहीं हो सकते या यूं कहे कि अपने समाज में जीवन में वह विशेष सफल उतने नहीं हो सकते कहीं ना कहीं एक सीधी सी बात है कि प्रारब्ध के चलते भाग्य के चलते आपको बैठे बिठाए चीजें मिल जाए वो और एक स्वतः आपने उत्पन्न किया हो उसमें अंतर है प्रिय दर्शकों आज आपको एक सूत्र बताने जा रहा हूं पहले तो यह जान लीजिए कि जितने भी बेहद सफल लोग हैं आज के इस परिवेश में उनकी जन्म कुंडली को देखा
जाए तो कुंडली में लग्नेश के साथ-साथ उनका त्रक भाव बहुत मजबूत है ध्यान रखिएगा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें वैदिक दृष्टिकोण से देखें वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो कुंडली के तक भाव का बहुत बली हो जाना जातक के जीवन काल में संघर्ष और परेशानियों को बढ़ाने वाला है लेकिन मैं सदैव समझाता रहा हूं आपको कि आज के इस परिवेश में ज्योतिष की जो परिभाषा है व थोड़ी अलग है आज के इस परिवेश में हम जन ज कुंडली का अध्ययन केवल और केवल भौतिक सुखों के विचार हेतु कर रहे हैं वहां देखा जाए तो जन्म कुंडली में तक भाव का बली होना मैंने जितनी भी ऐसी कुंडलियां देखी जहां जातक अपने जीवन काल में विशेष सफलता हासिल किए हुए हैं उसमें कहीं कोई दो मत नहीं कि लग्नेश मुझे हर कुंडली में बलि दिखा लग्नेश का बलि होना मतलब है जातक के अंदर वह चाहत होना महत्वाकांक्षा होना प्रिय दर्शको बिना महत्वाकांक्षा के इंसान सफल नहीं हो सकता इसके साथ-साथ मैंने देखा कि जन्म कुंडली के तक भाव 6 आ 12 अब जरूरी नहीं कि तीनों के तीनों लेकिन इसमें से कोई भी एक दो बली है तब भी जातक अपने जीवन काल में विशेष सफल दिखाई पड़ेगा लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है आज जिस सूत्र को मैं
बताने जा रहा हूं वह कुंडली का पंचम और षष्ठ जी जिन कुंडलियों में यह दोनों भाव बली है ल गनेश और लग्न के साथ साथ ये कभी मत भूलिए लग्न का बली होना हर कुंडली में मायने रखता है कुंडली चाहे कितनी भी बली हो लग्नेश अगर कमजोर हो जा रहे हालांकि इसके लिए भी सूत्र उपलब्ध है कि यदि आपकी जन्म कुंडली यानी लग्न कमजोर पड़ रहा है तो सूर्य और चंद्रमा को देख लीजिए यानी चंद्रमा बली है या सूर्य बली है तब भी आपको बली लग्न वाला माना जाएगा लेकिन हमेशा यह ध्यान रखिए कि यह विकल्प है और विकल्प हमेशा कमजोर होता है प्रथम पक्ष यही है कि लग्न बली हो लग्नेश बली हो प्रिय दर्शकों लग्नेश के साथ-साथ जिन कुंडलियों में पंचम और षष्ठ भाव मैंने बली पाया ऐसे जातक अपने जीवन काल में सफलता नहीं सफलता के उच्चतम स्तर पर मैंने उनको पाया मैंने पूर्व में एक सूत्र आपको बताया था कि जन्म कुंडली के जितने भी ऐसे लोग हैं जो बेहद सफल हैं उनकी कुंडली के पंचम भाव को देखिए बिना पंचम भाव के बली हुए जातक बहुत सफल नहीं हो सकता य एक बात और समझना है पंचम भाव कहीं ना कहीं हमारे पूर्व जन्म का द्वार है और यह भाव यदि बलि है इस भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि है मतलब
कहीं ना कहीं हमारा प्रारब्ध मजबूत ही रहा है अब जन्म कुंडली का षष्ठ भाव कैसा है यह हमारे लिए रोग रिपु और ऋण का भाव है और कमाल की बात जानिए मान लीजिए एक ऐसा राजा एक ऐसा सिद्धांत आपको मैं समझाने जा रहा हूं इसको जरा समझिए एक ऐसा राजा एक ऐसा राज्य जिस राज्य का राज्य शत्रु विहीन हो ऐसे राज्य के लोग सुखी हो सकते हैं परंतु कहीं ना कहीं उनकी तलवारें जंग खाई हुई होंगी समझिए इस बात को अगर आपके जीवन से समस्या को हटा दिया जाए तो मानव मन कैसा है मानव मन बेहद खुराफाती है अगर जीवन में इंसान के कोई कष्ट या परेशानी ना हो तो इंसान स्वयं अपने लिए परेशानी बन जाएगा यह आजमा लीजिएगा आप स्वयं अपने लिए परेशानी बन जाएंगे प्रिय दर्शकों जन्म कुंडली का षष्ठ भाव इस भाव के बलि होने से इस भाव के भावेश के बलि होने से जीवन में संघर्ष और परेशानी की स्थिति बनी रहती है और यही परेशानी हमारे तलवार को कभी जंग नहीं लगने देती अगर यह भाव सुप्त हो जाए आप गौर करिएगा मैंने पूर्व में देखिए अगर आप मेरे पूर्व दर्शक हैं कई बार आपको मन में यह विचार उत्पन्न होता रहता होगा कि जैसे पूर्व में मैंने यह कहा कि ये भाव सप्त है तो बहुत अच्छा है अब मैं कह रहा हूं कि
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे लोग बेहद सफल होते हैं कई बार लोग पूछते हैं कि आखिर आप कहना क्या चाहते हैं असल में आप समझ नहीं रहे हैं देखिए देश काल परिस्थिति के हिसाब से जब-जब वो चीजें जो लोगों को लोगों की जरूरत है मैं वोह आपको आपके समुख पोसतार्वेस्ट कुंडली के तक भाव जातक को जीवन काल में परेशानी ही देते हैं इस भाव के भाव पति जिस भाव में होंगे वहां परेशानी उत्पन्न करेंगे विशेष करके जन्म कुंडली का षष्ठ भाव इस भाव को सबसे बुरा भाव कहा गया है इस भाव के स्वामी जिस भाव में जाकर के बैठेंगे उस भाव की परेशानियां बढ़ा देंगे यह बात सत्य है पर अब मैंने कहा कि आज के इस परिवेश से देखा जाए जहां लोगों को धर्म से कोई विशेष लेना देना नहीं है हमारी जो चाहत है केवल और केवल भौतिक सुखों को लेकर के है वहां पर कुंडली का षष्ठ भाव जो रोग रिपु और ऋण का है विशेष करके रिपु अब रिपु का क्या अर्थ है रिपु का प्रथम अर्थ यही है शत्रु लेकिन असल में देखा जाए तो यहां पर हम सबों के जीवन में एक नहीं कई तरह के शत्रु हैं कई तरह के शत्रु हैं हमारी चाहतें ही हमारी शत्रु हैं लेकिन यह चाहते ही अगर कुंडली का षष्ठ भाव कमजोर हो तो कहीं ना कहीं एक बात तो
मैंने पहला पॉइंट यह बताया कि जहां तक खुराफाती इतना मानव है कि खुद अपने लिए परेशानी खड़ा करेगा दूसरे पॉइंट पर अगर आप जा कर के देखें ये समझिए दूसरे पॉइंट पर आप अगर जाकर के देखते हैं तो ऐसा जातक जीवन में उसकी चाहतें ही समाप्त हो जाएंगी क्योंकि महत्वाकांक्षा कहीं ना कहीं जुड़ी हुई है कुंडली के ष्ठ से बिना संघर्ष महत्वाकांक्षा पूर्ण नहीं होने वाली और कुंडली का षष्ठ भाव बली है तो जातक की महत्वाकांक्षा नहीं मरेगी और जन्म कुंडली के मैं ष्ठ की बात कर रहा हूं वैसे अष्टम और द्वादश की भी बात लेकर के चलिए लेकिन जन्म कुंडली का षष्ठ भाव मैंने जितनी भी कुंडलियों को देखा जो बहुत बड़े लेवल पर जिन्होंने धन अर्जित किया है और विशेष करके मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो एक सामान्य परिवार से गरीबी से निकल कर के बहुत आगे बढ़े हैं उनकी कुंडली के तीन भाव मुझे बहुत मजबूत दिखाई पड़े अब जरा गौर करिए किसी कुंडली में या तो यही तक भाव बली पड़ जाते हैं तो जातक के जीवन काल में संघर्ष किसी की कुंडली में भाव केवल और केवल अच्छे हो जाएं मैंने यही सूत्र समझाया था कि समझ ली कि कुंडली के सभी तक भाव कमजोर पड़ जाए इनके भावेश कमजोर पड़ जाए तब तब तो जातक का जीवन बहुत
सुखद हो जाएगा जवाब है नहीं उसका जीवन औसत दर्जे का हो जाएगा यानी वो इतना सुख अर्जित कर लेगा कि बस चैन से खा पी सो सके एकदम बेहतर ढंग से सफल हो सके व तभी संभव है जब जन्म कुंडली का पंचम अर्थात बुद्धि का भाव और षष्ठ अर्थात जोखिम का भाव बिना जोखिम लिए बिना बुद्धि लगाए जातक सफलता के सर्वोच्च शिखर पर कभी पहुंच ही नहीं सकता तो आगे से जब भी कोई जन्म कुंडली का अध्ययन करिए यदि कुंडली के यह तीन भाव आपको मजबूत दिखाई पड़ रहे हैं याद रखिए अब मान लीजिए लग्नेश कमजोर है परस ठेस बहुत बली है तब भी जातक के जीवन काल में संघर्ष बना रहेगा वो सफल नहीं होगा लेकिन लग्नेश बली है पंचम अर्थात उसकी बुद्धि बहुत मजबूत है कुशाग्र है और षष्ठ तो ऐसा जातक आप आंख बंद करके कहिए करोड़पति अरबपति छोटी बात है तुम इससे आगे की सोच सकते हो आशा करता हूं आज का य सूत्र आपने केवल समझा नहीं अपनी कुंडली पर भी आजमा लीजिए और मेरे पास कई ऐसी कुंडलियां अभी के समय में उपलब्ध हैं जिसे मैंने सुरक्षित कर रखा है कि हां ऐसे जातक जीरो से बहुत बड़ा सफर इन्होंने तय किया आज के लिए बस इतना ही इजाजत दीजिए पुनः मुलाकात होगी और इस सूत्र को अपनी जन्म कुंडली पर औरों की कुंडली पर घटा करके देख
लीजिए तब तक के लिए नमस्कार