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By Scary Town Hindi · 175 caption lines · Watch on YouTube
आशिका की नींद अपने क्लासरूम में खुलती है। वो हड़बड़ा कर टाइम देखती है। 4:00 बज चुके होते हैं। वो तुरंत अपना बैग उठाकर वहां से निकलती है। आशिका अब इंटरव्यू हॉल तक आती है। यहां 4:36 हो चुके होते हैं। शिट यार फिर से लेट हो गई। पता नहीं क्या होगा अंदर। कुछ और लड़कियां भी वहीं बेंच पर बैठी होती हैं। आशिका उन पर बिना ध्यान दिए इंटरव्यू हॉल में चली जाती है। मैडम सो सॉरी। मैं लेट हो गई। क्या मेरे इंटरव्यू का शेड्यूल निकल गया है? नाम क्या है तुम्हारा? आशिका। आशिका गुप्ता।
इंटरव्यूअर दूसरी लड़की को जो वहां पहले से ही थी उसे बाहर भेजती है और आशिका उसकी जगह आकर बैठ जाती है। आशिका तुम्हें पता है कि यह नौकरी तुम्हें तुम्हारे पिताजी की वजह से मिल रही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम समय की इज्जत करना छोड़ दो। सॉरी मैडम मैं पक्का आपसे टाइम पर आऊंगी। इंटरव्यूअर उसके ऑफर लेटर पर साइन करती है और उसे आशिका को थमा देती है। तुम्हारी पोस्टिंग रामगंज रेलवे स्टेशन पर है। तुम्हारी जॉइनिंग वैसे तो कल से है पर मेरी सलाह यही होगी कि तुम आज ही वहां पहुंच जाओ। जल्दी जाओगी तो वहां के लोगों से मिलना मिलाना भी हो जाएगा।
ठीक है मैम। मैं आज शाम को ही चली जाऊंगी। हाथ में ऑफर लेटर लिए आशिका वहां से निकल जाती है। बाहर आकर वह बाकी लड़कियों पर हल्का सा हंसती है और यहां बैठने की जरूरत नहीं है। इस साल की सीट तो फुल हो गई है। दूसरी लड़कियों को यह पक्षपात देखकर बुरा लगता है। पर वह बेसहारा होती है। उसी रात रामगंज के प्लेटफार्म पर एक ट्रेन आती है। ट्रेन से उतरने वाली आशिका ही होती है। वो स्टेशन मास्टर के ऑफिस की तरफ जाती है। पर वहां ताला लगा होता है। स्टेशन भी बिल्कुल सुनसान होता है।
यार ये क्या? सोचा था यहां पहुंचकर आराम करूंगी। पर यहां तो कोई है ही नहीं। कुछ देर बाद वह एक बेंच पर बैठ जाती है। थोड़े समय बाद उसे एक अजीब सी औरत प्लेटफार्म की दूसरी तरफ खड़ी दिखाई देती है। उसका चेहरा लंबे बालों से ढका हुआ है और मानो वो औरत आशिका को बस घू रे जा रही है। आशिका उससे बात करने के लिए आगे बढ़ती है। कौन हो तुम? एक्सक्यूज मी। क्या तुम यहीं की हो? हेलो। आशिका जैसे ही उसके पास पहुंचती है वो औरत यहां से चली जाओ। [चीखने की आवाज़] हमें पता चलता है कि जो कुछ भी हुआ वो महज एक सपना था। आशिका की नींद टूट जाती है और वो अपने सामने एक वॉचमैन को पाती है। उसे देखकर आशिका और डर जाती है। हल्की रोशनी में उस वॉचमैन की शक्ल भी किसी भूत से कम नहीं थी।
कौन हो तुम? मैडम मैं तो यहां का वॉचमैन हूं। ऑफिस की चाबी लेकर आया था। कहां थे इतनी देर से? बताया था ना ट्रेन 10:00 बजे यहां पहुंच जाएगी तो तुम इतने लेट क्यों आए? माफ कीजिए मैडम। बूढ़ा इंसान हूं। अकेले रहता हूं। गलती हो गई। आगे से ऐसा नहीं होगा। आइए मैं आपके लिए ऑफिस खोल देता हूं। वॉचमैन ऑफिस के पास जाता है और उसके लिए ऑफिस खोल देता है। लाइट चालू होते ही आशिका ऑफिस की हालत देखती है। टेबल पर सिगरेट, टूटी टीवी, सड़ा हुआ खाना यह सब देखकर वो चिढ़ जाती है।
ये क्या? यहां इतनी गंदगी क्यों है? मेरे आने से पहले साफ सफाई नहीं हुई थी क्या यहां? माफ कीजिएगा मैडम। आपके पहले यहां जो अफसर आए थे, उनकी ट्रेन के नीचे आकर दर्दनाक मौत हो गई थी। उस दिन से यह जगह पुलिस वालों ने सील कर दी थी। आज ही इसकी चाबी मिली है। आप फिक्र मत कीजिए। मैं अभी यह जगह साफ कर देता हूं। वॉचमैन सब कुछ साफ कर देता है और फिर आशिका अपनी चेयर पर बैठ जाती है। ये जगह इतनी खाली क्यों है? क्या यहां कोई रहता नहीं?
इस स्टेशन से 10 कि.मी. की दूरी पर गांव है। लोग इस स्टेशन को भूतिया कहते हैं। इसीलिए रात को कोई यहां आना पसंद नहीं करता। क्या मतलब भूतिया? कुछ सालों पहले यहां की पटरी पर एक औरत ने आत्महत्या की थी। तभी से इस जगह को लोग भूतिया जगह मानते हैं। बेकार की बातें हैं ये। अच्छा जाओ मेरे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आओ। भूख लगी है। माफ कीजिएगा मैडम। मैं तो बस यहां आपको चाबी देने आया था। मैं यहां नहीं रुक सकता। भला वो क्यों?
क्या आपने सुना नहीं? यह स्टेशन भूतिया है। क्या कहानी है इस भूत की? अरे कुछ नहीं मैडम पागल थी। यहां पटरी पर लेट कर जान दे दी उसने और तब से हमेशा कलेश ही लगा रहता है। क्या सच? हां हां और नहीं तो क्या? ठीक है। मैं चलता हूं। कल सुबह 10:00 बजे मिलूंगा। यह कहकर वॉचमैन वहां से चला जाता है। पर फिर उसका फोन बजता है। फोन करने वाली कोई और नहीं बल्कि आशिका खुद होती है। क्या है यार इन शहर के लोगों का? हेलो मैडम बोलिए।
हां भैया। मैं यह कह रही थी कि मेरे आज के आने का प्लान कैंसिल हो गया था। तो मैं कल सुबह 12:00 बजे तक आऊंगी। आप ऑफिस तब खोल देना। यह सुनकर उसके दिल में सेहरन दौड़ जाती है। हेलो। हेलो। हेलो वॉचमैन वो वहां से भाग कर जाने ही वाला होता है कि नहीं नहीं मुझे छोड़ दो मुझे माफ कर दो। क्या कहा था तूने? पागल थी। हां आज से महज 2 महीने पहले रमेश नाम के एक व्यक्ति ने रेलवे के एग्जाम को सबसे अच्छे नंबर से पास किया था। वो घर आकर अपनी बीवी गीता को यह सब बताता है। अरे गीता देवी कमाल हो गया। पता है यह क्या है?
क्या? मेरा रेलवे में सिलेक्शन हो गया है और कल इंटरव्यू है। अब मेरी नौकरी पक्की। भगवान का लाख-लाख शुक्र है। तुम्हारी नौकरी लगने के बाद हम अपनी मुन्नी को अच्छे स्कूल में डालेंगे। पर अगले ही दिन जब रमेश इंटरव्यू देने पहुंचा था, उसे यह पता चला कि उसके हक की नौकरी किसी और को दे दी गई थी। जबकि उस लड़के के नंबर रमेश से काफी कम थे। रमेश यह तकलीफ सह नहीं पाया। उसने एक चिट्ठी लिखकर अपने ही घर पर खुदकुशी करने का फैसला किया। यह दुनिया बहुत बुरी है। यहां आगे सिर्फ वही बढ़ता है जिसकी पहुंच ऊपर तक हो। मुझे माफ करना गीता। मैं तुम्हें एक अच्छी जिंदगी नहीं दे पाया। मुन्नी का ध्यान रखना।
गीता मुन्नी के साथ इंसाफ मांगने स्टेशन ऑफिस गई जरूर थी। पर यहां मेरे पति को नौकरी मिलनी चाहिए थी। जो वहां है उसको बाहर निकालो। हमारे साथ नाइंसाफी हुई है। कौन है यह? निकालो इसे यहां से। वॉचमैन ने उसकी एक ना सुनी और उसे धकेल दिया। इस दुख को गीता सह ना सकी और उसने भी उसी स्टेशन पर ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या कर ली। यह आत्मा कोई और नहीं बल्कि गीता खुद थी जो रामगंज स्टेशन पर अपने बदले का इंतजार कर रही थी। वो वॉचमैन का गला और जोर से घूंटती है।
उसे तो उसकी गलतियों की सजा मिल गई। आ अब बारी तेरी है। तभी वहां ट्रेन की हॉर्न की आवाज आती है। ट्रेन जैसे ही वहां पहुंचती है गीता उस वॉचमैन को। अगले दिन रामगंज स्टेशन पर और एक ट्रेन पहुंचती है। गीता ट्रेन से उतर कर सुनसान स्टेशन पर यहां वहां देखती रहती है। तुम आशिका हो ना? हां, मैं यहां की नई स्टेशन मास्टर हूं। आइए मैं आपको ऑफिस खोल कर देती हूं। आशिका अपने ऑफिस की तरफ चलती है। इस बात से बिल्कुल अनजान कि आज रात।